Pujapath Vedic Need Help? Chat with us
Need Help? Chat with us
image

Maa Katyayani – The Fierce Warrior Goddess of Righteousness

Blog

Maa Katyayani, worshipped on the sixth day of Navratri, is the fearless destroyer of evil and remover of marriage obstacles. Her divine strength brings courage, clarity, and justice.

22
Shivam Gangwar 8 min
Apr 04, 2025

Maa Katyayani – The Fierce Warrior Goddess of Justice and Courage

Navratri, the festival of nine nights, is a divine celebration of the nine forms of Goddess Durga. On the sixth day, devotees worship Maa Katyayani, a powerful and fierce form of Shakti known for destroying evil and upholding righteousness.

She is revered as the Goddess of War, Justice, and Strength, and is especially worshipped for removing obstacles in marriage and granting courage to face life’s battles.

Who is Maa Katyayani?

Maa Katyayani is the sixth form of Goddess Durga. Her name originates from Rishi Katyayan, a great sage from the Katya lineage. According to legend, he performed intense penance to please Goddess Durga, wishing for her to be born as his daughter. The divine energy born from the combined powers of the gods to defeat the demon Mahishasura took birth in his ashram, hence named Katyayani.

She is depicted as:

  • Riding a lion, symbolizing courage.
  • Having four arms.
  • One hand holds a sword.
  • Another holds a lotus.
  • One hand is in Abhaya Mudra (protection gesture).
  • The fourth in Varada Mudra (blessing gesture).
  • Her form exudes divine rage, justice, and victory over evil.

Maa_Shailputri

Symbolic Significance of Maa Katyayani

Maa Katyayani is worshipped as the destroyer of demons and negative energies. She is fierce yet benevolent to her devotees. Her blessings bring:

  • Courage and confidence to face life’s challenges.
  • Victory over enemies and obstacles.
  • Success in marriage and removal of marital issues.
  • Inner strength and emotional healing.
  • Righteousness and justice in one’s actions.

Spiritual Connection – Ajna Chakra (Third Eye Chakra)

Maa Katyayani is associated with the Ajna Chakra or the Third Eye Chakra, which represents intuition, awareness, and perception. Worshipping her helps activate inner wisdom, sharpens decision-making, and leads one towards spiritual awakening.

Legend of Maa Katyayani

According to Hindu scriptures, when the demon Mahishasura became invincible and began terrorizing heaven and earth, the gods created a supreme energy from their collective powers. This energy took the form of Maa Katyayani, who was born in the ashram of Rishi Katyayan.

With immense courage and strength, she led the battle against Mahishasura, ultimately slaying the demon and restoring peace and dharma. This story symbolizes the victory of good over evil and inspires us to stand against injustice.

Significance of Worship on the Sixth Day

On the sixth day of Navratri, Maa Katyayani is invoked for:

  • Removing obstacles in marriage, especially for unmarried girls seeking a life partner.
  • Granting strength to overcome emotional and physical struggles.
  • Destroying inner evils like anger, ego, and fear.
  • Promoting justice and righteousness in society and personal life.

How to Worship Maa Katyayani

Devotees follow these steps to worship Maa Katyayani:

  • Morning purification – Take a bath and meditate with a calm mind.
  • Offer yellow flowers, honey, and sandalwood paste, as she is fond of these.
  • Light a ghee lamp and chant her mantra:

🕉️ “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः”

Recite the Durga Saptashati or specific Katyayani stotras.

Perform Aarti with full devotion.

Feed girls (Kanya Puja) on the sixth or later days of Navratri as a mark of respect to the Goddess.

Blessings of Maa Katyayani

Worshipping Maa Katyayani bestows:

  • Strength to fight injustice and falsehood.
  • Peace and harmony in relationships.
  • Relief from fear, doubt, and negativity.
  • Guidance and clarity in life’s important decisions.
  • Spiritual insight and intuition.

Conclusion

Maa Katyayani teaches us that strength lies in righteousness, and true power is used to protect the weak and destroy evil. Her worship during Navratri is a call to awaken the inner warrior, stand for truth, and walk the path of dharma. With her blessings, we gain courage, clarity, and divine protection in every sphere of life.

Let us bow with devotion and seek her grace on this auspicious sixth day of Navratri.

Jai Maa Katyayani! 🙏🔱


मां कात्यायनी – न्याय और साहस की योद्धा देवी

नवरात्रि के नौ पावन दिनों में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इन नौ शक्तियों में छठे दिन की आराध्या हैं मां कात्यायनी, जो शक्ति, न्याय और रौद्रता का प्रतीक मानी जाती हैं।
वे विशेष रूप से दुष्टों का नाश करने, न्याय स्थापित करने और विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने वाली देवी के रूप में पूजी जाती हैं।

मां कात्यायनी कौन हैं?

मां कात्यायनी देवी दुर्गा का छठा स्वरूप हैं। उनके नाम का उद्भव ऋषि कात्यायन से हुआ, जिन्होंने देवी को पुत्री रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। देवी ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उनके आश्रम में जन्म लिया और कात्यायनी नाम से प्रसिद्ध हुईं।

उनका दिव्य स्वरूप:

  • वे सिंह पर सवार रहती हैं।
  • उनकी चार भुजाएं होती हैं:
  • एक हाथ में खड्ग (तलवार),
  • दूसरे में कमल पुष्प,
  • एक हाथ अभय मुद्रा में,
  • और एक हाथ वरद मुद्रा में होता है।
  • उनका स्वरूप क्रोधयुक्त, तेजस्वी और रक्षक होता है।

मां कात्यायनी का प्रतीकात्मक महत्व

मां कात्यायनी अधर्म और अन्याय का विनाश करने वाली देवी हैं। उनकी पूजा से जीवन में निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • साहस और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
  • दुश्मनों और बाधाओं पर विजय मिलती है।
  • विवाह में रुकावटें समाप्त होती हैं
  • नकारात्मक ऊर्जा और भय का नाश होता है
  • न्याय, सच्चाई और धर्म की स्थापना होती है।

आध्यात्मिक संबंध – आज्ञा चक्र (तीसरा नेत्र)

मां कात्यायनी का संबंध आज्ञा चक्र (Third Eye Chakra) से माना जाता है, जो आंतरिक ज्ञान, अंतर्ज्ञान और विवेक का केंद्र है। उनकी आराधना से यह चक्र सक्रिय होता है और व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता, आध्यात्मिक दृष्टि और आत्मबल विकसित होता है।

मां कात्यायनी की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, जब महिषासुर नामक राक्षस ने स्वर्ग और पृथ्वी पर अत्याचार शुरू किया, तब सभी देवताओं ने अपनी शक्तियों का संयोग कर एक महाशक्ति का निर्माण किया। यह शक्ति ऋषि कात्यायन के घर पुत्री रूप में जन्मी और आगे चलकर उसने महिषासुर का वध किया।

यह कथा सत्य की विजय और धर्म की पुनर्स्थापना का प्रतीक है।

छठे दिन की पूजा का महत्व

मां कात्यायनी की पूजा से:

  • विवाह में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं
  • दु:ख, भय और मानसिक समस्याओं का नाश होता है
  • निर्णय लेने में स्पष्टता और आत्मविश्वास मिलता है
  • अधर्म और अन्याय के खिलाफ लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है

मां कात्यायनी की पूजा विधि

छठे दिन भक्त निम्नलिखित विधि से मां की पूजा करते हैं:

  • प्रातः स्नान कर शांत मन से ध्यान करें।
  • मां को पीले फूल, शहद, और चंदन अर्पित करें।
  • घी का दीपक जलाएं और निम्न मंत्र का जाप करें:

🕉️ “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः”

दुर्गा सप्तशती का पाठ या कात्यायनी स्तोत्र का पाठ करें।

आरती और भजन गाएं।

कन्या पूजन करें और उन्हें भोजन कराएं।

मां कात्यायनी की कृपा से लाभ

  • नकारात्मक ऊर्जा और शत्रु बाधा का नाश होता है
  • वैवाहिक जीवन में सुख और सामंजस्य बना रहता है
  • आत्मबल, साहस और आत्मविश्वास प्राप्त होता है
  • आध्यात्मिक जागरण और अंतर्ज्ञान की शक्ति बढ़ती है

निष्कर्ष

मां कात्यायनी हमें यह सिखाती हैं कि सच्चा बल वह है जो धर्म के लिए प्रयोग में लाया जाए। उनकी पूजा हमें भीतर की नकारात्मकताओं को नष्ट करने, सच के लिए खड़े होने, और धार्मिक जीवन जीने की प्रेरणा देती है।

छठे दिन, मां कात्यायनी की कृपा प्राप्त कर हम अपने जीवन को शक्ति, साहस और न्याय से भर सकते हैं।

जय मां कात्यायनी! 🙏🔱


 

Related